اتوار، 4 جنوری، 2026

किन ग्रंथों और पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर आप हज़ारों मंदिर तोड़ने ....

किन ग्रंथों और पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर आप हज़ारों मंदिर तोड़ने की बात दावे से कह रहे हैं? या जो लोग ऐसा दुष्प्रचार करते हैं उनसे इस दावे के कभी प्रमाण मांगे हैं?
हां मंदिर तोड़े गए थे लेकिन उनकी संख्या अर्ध शतक तक भी नहीं पहुंचती है। सबके अलग अलग कारण थे। वो सभी मंदिर इसलिए नहीं तोड़े गए थे क्योंकि वो तत्कालीन शासकों की धार्मिक आस्था की विलोम आस्था वालों के पूजास्थल थे।
अब बात लूट की....
मुगलों ने क्या लूटा और लूटकर कहां ले गए?
सभी मुगल बादशाह विभाजन पूर्व भारत में मरे/दफन हुए। सिर्फ बहादुरशाह जफर अपवाद हैं। जो भारत की मिट्टी में दफन होने की आस में तड़पते रहे और रंगून में मरकर दफन हुए।
क्यों मरे बेमौत? 
क्यों पाया देश निकाला❓
वो भी तत्कालीन दूसरे राजाओं की तरह (राजपूताना, ग्वालियर etc) पेंशन लेकर मौज करते रहते। क्यों बेकार में बागी सिपाहियों और किसानों की गुहार स्वीकार की? क्योंकि उनका नेतृत्व करना स्वीकार किया? तब बहादुर शाह का राज्य था ही कितना बड़ा? बस दिल्ली से लेकर पालम तक। 
मेरठ जहां से बागी सिपाही गुहार लगाने आए थे वो भी बहादुर शाह के राज्य का हिस्सा नहीं था। तब क्यों?
अब आप बोलोगे कि बहादुर शाह के पास मुगल सल्तनत को फिर से मजबूत करने का अच्छा मौका था। अगर आप ऐसा सोचते हैं तो गलत अनुमान है आपका।

सच तो ये है कि अंग्रेज बहुत ही संगठित थे। उनकी फौज के पास आधुनिक बंदूकें और घातक गोला बारूद था। जिनका मुकाबला ज्यादा दिन तक कर पाना संभव ही नहीं था।
बहादुर शाह भी ये बात जानते थे। उनके कुछ दरबारियों ने जब बागी सिपाहियों का समर्थन करने से बादशाह को रोका तो उन्होंने कहा था,

"जानता हूं बागी नौजवानों का साथ देने का फैसला मुझे और मेरी सल्तनत को तबाह कर देगा। लेकिन बड़ी उम्मीद लेकर मेरे पास आए बागी बच्चों को किस मुंह से इनकार करूं? मदद मांगने आए लोगों को खाली हाथ लौटना मुगलों का दस्तूर नहीं। अब जो होगा देखा जायेगा। अगर खुदा को मेरी तबाही मंजूर है तो मुझे कुबूल है। लेकिन मैं बागी सिपाहियों को मायूस नहीं लौटा सकता!"

कितने बड़े लुटेरे थे बहादुर शाह जफर?
नहीं?.....
एक और मुगल बादशाह भारत से बाहर दफन है। नाम है बाबर। जो मरा भारत में। पहले भारत में दफनाया गया। बाद में ताबूत को काबुल के एक बाग में ले जाकर दफना दिया गया। क्योंकि वही बाबर की अंतिम इच्छा थी।
अब बताइए.....
मुगलों ने अपनी कब्रों में लूटा गया माल छुपा रखा है क्या या स्विस बैंक में जमा करा दिया था?????
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हमारे हिंदू राजाओं द्वारा दूसरे हिंदू राजाओं के राज्यों में लूटमार के दो उदाहरण :

दक्षिण भारत में स्थित पवित्र श्रंगेरी मठ कौन से बदमाश मुगल ने लूटा था? 
वही मठ जिसे टीपू सुल्तान से विशेष ग्रांट्स (धन/धान्य और जायदाद) की रेगुलर मदद मिला करती थी।
श्रंगेरी मठ को वीर मराठों ने लूटा था श्रीमान जी। सिर्फ मठ ही नहीं कभी पूरे भारत में मराठों की लूटमार और कत्लेआम का इतिहास पढ़ लेना।
मराठों के हमलों से अकेले बंगाल और उड़ीसा में 10 साल के भीतर लाखों आम नागरिक मारे गए थे। शायद 4 लाख (,exact फिगर भूल रहा हूं)! अब बंगाली और उड़िया सैनिकों की संख्या का अंदाजा आप खुद लगा लें। सनद रहे कि मराठों के हाथों बंगाल/उड़ीसा में मारे गए आम नागरिकों और सैनिकों में हिंदू जनों की संख्या 80 फीसदी से ऊपर थी।
मराठों की लूटमार से रक्षा के लिए कलकत्ता के लोगों ने शहर के चारों ओर एक ट्रेंच (गहरी खाई) खोद ली थी। जिसके चिन्ह अब भी कोलकाता में मौजूद हैं।
बंगाल में माएं आज भी अपने बच्चों को "बरगी" शब्द से डराती हैं। सो जा बेटा वरना "बरगी" आ जाएंगे। बरगी यानी अत्याचारी मराठे। जिन्हें तब बंगाल में गब्बर सिंह जैसी ख्याति प्राप्त थी।
"महाराष्ट्र पुराण" नाम का ग्रंथ उसी समय एक बंगाली ब्राह्मण ने लिखा था। जिसमें पंडित जी ने मराठों को पानी पी पी कर कोसा था। उन्होंने बंगाली जनता से कहा था कि मां काली ने उनके सपने में आकर आप लोगों के लिए खास संदेश दिया है। वो ये कि, संगठित हो जाओ और लुटेरे/हत्यारे मराठियों से मुकाबला करो। बंगाल के मुस्लिम नवाब से सहायता मांगो। नवाब की सेना की मदद से मराठों का नाश करो। इत्यादि।

मराठों की लूटपाट से पूरा राजपूताना त्रस्त था। जब मर्जी होती थी आते थे और क्राइम मास्टर गोगो की तरह राजस्थान के शहरों और राजाओं को लूटकर चले जाते थे। मराठों की लूटमार के चलते एक समय तो पूरा जयपुर शहर खाली हो गया था।

एक बार सोमनाथ मंदिर के इतिहास के बारे में भी पढ़ लें। तब आपको पता चलेगा कि किस हिंदू राजा ने वहां लूटमार की थी? और कौन लोग थे वो जो सोमनाथ के तीर्थ यात्रियों को रास्ते (गुजरात) में लूटा करते थे?

मेरी लिखी एक एक बात क्रॉस चेक कर सकते हैं आप। मैं सबके तत्कालीन सोर्स भी बता सकता हूं। लेकिन बता इसलिए नहीं रहा हूं ताकि आप खुद खोजकर पढें। तब आपको कुछ और नई जानकारियां भी हासिल होंगी। जिन्हें पढ़कर आप शायद चौंक जाएं कि नागपुर से प्राप्त व्हाट्स ऐप इतिहास में तो कुछ और ही लिखा है।
-Gairik Rpt

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